[PDF] नागार्जुन का जीवन परिचय – Nagarjun Ka Jivan Parichay

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क्या आप लोग ‘Nagarjun Ka Jivan Parichay’ को खोज रहे है? तो इस लेख में हम लोग कवि नागार्जुन का जीवन परिचय के बारे में चर्चा करने वाले है.

Table of Contents

आज के इस लेख में हम लोग नागार्जुन का जीवनी से सम्बंधित्सभी चीजो के बारे में एक – एक करके जानेंगे.यदि आप लोग इस लेख को पूरा पढ़ते है तो आपको Nagarjun Ka Jeevan Parichay में किसी भी प्रकार का दिक्कत नही होने वाली है. मैंने यह लेख बहुत ही रिसर्च करने के बाद लिखा हु, आपको इन्टरनेट पे बहुत सी लेख मिल जायेंगी पर सबसे सही जानकारी आपको हमारे नागार्जुन का जीवन परिचय के इस लेख में मिलेगी.

संक्षिप्त में कवि Nagarjun Ka Jivan Parichay in Hindi को जानिए

प्रिय छात्रो पहले हम लोग एक टेबल के माध्यम से Nagarjun Ka Jivan Parichay को संक्षिप्त में समझने का प्रयास करते है. हम पहले कवि नागार्जुन के बारे में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य को जान लेते है उसके बाद से हम इनका पूरा जीवनी को विस्तार से समझेंगे.

पूरा नामकवि नागार्जुन
अन्य नामबैधनाथ मिश्र
जन्म वर्ष11 जून सन् 1911 ई०
जन्म स्थानमधुबनी जिले के अंतर्गत ग्राम सतलखा, बिहार
पिता जी का नामश्री गोकुल मिश्र
माता जी का नामश्रीमती उमा देवी
पत्नी का नामअपराजिता
पेशाकवि , उपन्यासकार एवं लेखक
कालआधुनिक काल
भाषाहिन्दी, संस्कृत , मैथिलि एवं बंगाली
शैलीस्पष्ट एवं सरल
आन्दोलनप्रगतिवाद
पुरस्कारसाहित्य अकादमी, राजेंद्र प्रसाद पुरस्कार
प्रमुख रचनाये‘युगधारा’, ‘सतरंगें पंखों वाली’ एवं ‘ तालाब की मछलियां’ आदि
मृत्यु वर्ष5 नवम्बर सन् 1998 ई०
मृत्यु स्थानजिला दरभंगा, बिहार

प्रिय छात्रो आप लोग उपर एक टेबल के माध्यम से Nagarjun Ka Jivan Parichay Hindi mein को संक्षिप्त में समझ सकते है और इसके मदद से भी आप पूरा नागार्जुन का जीवन परिचय को बड़े आराम से लिख सकते है. आगे हम लोग अब नागार्जुन का जीवन परिचय और रचनाएं लिखिए को विस्तार से समझेंगे.

कवि नागार्जुन का जीवन परिचय विस्तार से

कवि नागार्जुन का जन्म 11 जून सन् 1911 ई० में मधुबनी जिले के अंतर्गत ग्राम सतलखा, बिहार में एक ब्राहमण परिवार में हुआ था. सतलखा इनके नैनिहाल था और वही पे वह जन्मे थे. नागार्जुन का पैतृक गावँ तरौनी दरभंगा था. नागार्जुन का वास्तविक नाम वैधनाथ मिश्र था.

नागार्जुन के पिता जी का नाम श्री गोकुल मिश्र था. इनके पिता जी कुछ भी कमाते धमाते नही थे. इनका रोजी रोटी पूजा – पाठ था उसी से जो भी कमाई होती थी तो घर चलता था. नागार्जुन के माता जी का नाम श्रीमती उमा देवी था जिन्होंने इन्हें खूब लाड – प्यार दिया क्योंकि नागार्जुन चार संतानों के बाद जन्म लिए थे. नागार्जुन के माता – पिता से जन्मे पहले चार संतान किसी कारण वश चल बसे थे.

नागार्जुन की पत्नी का नाम अपराजिता था. नागार्जुन की बचपन बहुत ही गरीबी और दुःख में बिता है इसलिए इनकी प्रारम्भिक शिक्षा घर पर ही हुई है. नागार्जुन घर पर ही किताबो को खूब पढ़ा करते थे और इनको किताब से असीम लगाव हो गया.

नागार्जुन एक आधुनिक काल के कवि रहे है और इन्होने प्रगतिवाद आन्दोलन को भी समर्थन दिया. नागर्जुन को साहित्य अकादमी एवं राजेंद्र प्रसाद पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है. इनकी भाषा हिन्दी, संस्कृत एवं मैथिलि आदि रही है. नागार्जुन की मृत्यु 5 नवम्बर सन् 1998 ई० में जिला दरभंगा, बिहार में हुआ था.

नागार्जुन का बचपन जीवन

नागार्जुन का बचपन कठिनाइयों और गरीबी से भरपूर रहा. उनके परिवार का आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर था और उनके पिता के व्यवहार का प्रभाव भी नागार्जुन पर पड़ा. इसके बावजूद, नागार्जुन ने अपनी पढ़ाई में मेहनत की और आत्म-साक्षरता प्राप्त की. उन्होंने अपने जीवन के प्रारंभिक दिनों से ही कविता लिखने की शुरुआत की और बाद में इस क्षेत्र में अपना नाम कमाया. उनके बचपन के अनुभवों और जीवन के संघर्षों ने उनके लेखन को साहित्यिक दुनिया में गहरा महत्व दिलाया.

नागार्जुन की माता – पिता

नागार्जुन के पिता का नाम गोकुल मिश्र था, और उनकी माता का नाम श्रीमती उमादेवी था. इनके पिता और माता को चार संतानों की प्राप्ति हुई थी, लेकिन चारों की इस दुनिया से विदा हो गये थे. इनके पिता और माता ने भगवान शिव से एक पुत्र की प्राप्ति के लिए आवाज़ की थी, और वे वैद्यनाथ मिश्र के रूप में जन्म लिये थे. नागार्जुन के पिता ने सोचा कि शायद यह बच्चा ज्यादा दिन तक जीवित नहीं रहेगा और इसलिए उसे “ठक्कन” नाम से पुकारने लगे. नागार्जुन अपने माता-पिता के लिए एक आशीर्वाद बने और उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बने.

नागार्जुन की प्रारम्भिक शिक्षा

नागार्जुन की प्रारम्भिक शिक्षा घर से ही शुरू हुई थी, और वे अपने जीवन में बड़े ही समर्पित और प्रतिबद्ध थे. उन्होंने घर पर ही बहुत सारी किताबें पढ़ी और उनके पास संस्कृत में अच्छा ज्ञान था. उन्होंने तरौनी, गनौली और पचगछिया के संस्कृत पाठशालाओं में अपनी शिक्षा जारी रखी और बनारस से भी संस्कृत की पढ़ाई की.

नागार्जुन की शिक्षा इस तरह की थी कि वे अपने विद्यार्थी जीवन में आर्य समाज से जुड़ गए और बौद्ध धर्म की ओर अधिक आकर्षित हुए. उन्होंने अपनी यात्राओं के दौरान भी धार्मिक और दार्शनिक चिंतन का पालन किया और इन यात्राओं में वे कई जगहों की यात्रा करने का अवसर प्राप्त करें, जिसमें श्रीलंका भी था. उनका परिचय भारतीय लेखक और विचारक राहुल सांकृत्यायन से हुआ, जिन्होंने भी बौद्ध धर्म से प्रभावित थे. नागार्जुन ने सन् 1926 में काव्यतीर्थ उपाधि प्राप्त की और उन्होंने पाली भाषा की पढ़ाई को भी मजबूत किया.

नागार्जुन का राजनीति में प्रवेश

नागार्जुन ने अपने बड़े होते ही राजनीति में रुचि दिखाई, और उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई. उन्होंने चंपारण के किसान आंदोलन में भी किसानों के साथ मिलकर सहयोग किया. उनका यह सामाजिक और राजनीतिक सक्रियता का समय था, और वे आम जनता के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने की बजाय अद्वितीय नेता नेताजी सुभाष चंद्र बोस के अनुसरण करने लगे थे.

नागार्जुन का विवाह

नागार्जुन का विवाह अपराजिता नाम की लड़की के साथ हुआ था. वे हीरपुर बवशी टोल की रहने वाली थीं. हालांकि नागार्जुन के वैवाहिक जीवन में बहुत सारी कठिनाइयां थीं, क्योंकि उनके पिता का व्यवहार उनके और उनकी पत्नी के बीच में कई समस्याओं का कारण बनता था. नागार्जुन ने अपने पिता के साथ के व्यवहार के कारण घर छोड़ दिया था, और उनकी पत्नी अपराजिता देवी की उम्र उस समय मात्र बारह वर्ष थी.

बाद में 1941 में नागार्जुन घर लौटे, लेकिन उनके वैवाहिक जीवन में कई समस्याएं आईं और उनके पिता की सतत टांग खिचाई उनके परिवारिक जीवन को कठिन बना दी. उनके चार बेटे और दो बेटियां थीं, और उनकी पत्नी अपराजिता देवी की मृत्यु 1997 में हो गई थी. इसके बाद, नागार्जुन ने अकेलापन का सामना करना पड़ा.

नागार्जुन की मृत्यु

नागार्जुन की मृत्यु 5 नवम्बर 1998 को हुई. उनका निधन बिहार के दरभंगा जिले में हुआ. वे एक महान हिन्दी कवि थे और उनका काव्य आज भी प्रशंसा प्राप्त करता है. नागार्जुन की मृत्यु एक दुखद दिन था, जिसने हिन्दी साहित्य को एक महान कवि की हानि की. उनके शब्दों का प्रभाव आज भी हमारे बीच में बना है, और वे याद किए जाते हैं.

Free Nagarjun Ka Jivan Parichay PDF

प्रिय छात्रो अब हम लोग Nagarjun Ka Jivan Parichay PDF को मदद से पढेंगे. मैं आपको कवि नागार्जुन का जीवन परिचय का पीडीऍफ़ फाइल आप सभी के साथ साझा करने वाला हु जिसे आप लोग बिना इन्टरनेट के कभी भी पढ़ सकते है. इस पीडीऍफ़ में आपको जीवनी के साथ साहित्यिक परिचय एवं इनकी रचनाये आदि भी उपलब्ध रहेंगी.

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LanguageHindi
Nagarjun Ka Jivan Parichay PDF

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कवि नागार्जुन का साहित्यिक परिचय PDF

कवि नागार्जुन का जीवन और साहित्यिक परिचय भारतीय साहित्य के इतिहास में एक महत्वपूर्ण योगदान हैं. उनके शब्दों में समाज के सबसे गहरे मुद्दे और समाजिक अन्याय की आलोचना होती है, और वे हमें यह सिखाते हैं कि समाज में समझौता नहीं करना चाहिए, बल्कि समाज में न्याय और समानता की प्राथमिकता देनी चाहिए.

नागार्जुन का जीवन और साहित्यिक योगदान

कवि नागार्जुन, भारतीय साहित्य के एक महत्वपूर्ण नाम हैं. उन्होंने अपने शब्दों से समाज के सबसे अधिक छूने जाने वाले मुद्दों पर गंभीर चर्चा की. उनका साहित्य अत्यंत गम्भीर और समाज सेवा केंद्रित है.

समाज के प्रति आलोचना और समझौता नहीं

नागार्जुन की कविताओं में समाज के विभिन्न पहलुओं के प्रति उनकी गहरी आलोचना होती है. उन्होंने दलितों, गरीबों, और समाज के निचले वर्गों के साथ हो रहे अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाई. उनकी कविताओं में समाज के अन्याय को उजागर किया गया और उन्होंने समझाया कि समाज में समझौता नहीं करना चाहिए.

समाज के साथी के साथ गहरा संबंध

नागार्जुन की कविताओं में उनके समाज के साथी के प्रति गहरा संबंध था. वे उनके दुख-दर्द को भावनात्मक तरीके से व्यक्त करते थे और इससे व्यक्तिगत संवाद का निर्माण होता था.

राजनीति और समाजिक समस्याएं

नागार्जुन की कविताओं में वे समसामयिक, राजनीतिक और सामाजिक समस्याओं पर भी गहरी चर्चा करते थे. उन्होंने अपनी कविताओं में समाज में चल रहे समस्याओं को उजागर किया और लोगों को उन समस्याओं का समाधान ढूंढने की प्रेरणा दी.

व्यंग्य और व्यक्तिगतता

नागार्जुन अपनी कविताओं में व्यंग्य का प्रयोग करने में संकोच नहीं करते थे. उनकी कविताएँ तीखी चोट करने वाली थीं और सामाजिक अन्याय के खिलाफ उनकी उच्च उठाने वाली आवाज होती थी.

नागार्जुन की विशेषता

नागार्जुन अपने साहित्य में मानवीय संवेदनाओं को गहरी से छूने के लिए जाने जाते हैं. उनकी कविताएँ आज भी हमारे दिलों में गूंथी हुई हैं और हमें समाज में न्याय और समानता की ओर अग्रसर करने की प्रेरणा प्रदान करती हैं.

कवि नागार्जुन की प्रमुख रचनाएँ

नागार्जुन की प्रमुख रचनाये – ‘युगधारा’, ‘सतरंगें पंखों वाली’ एवं ‘ तालाब की मछलियां’ आदि है. नागार्जुन, भारतीय साहित्य के एक प्रमुख कवि और लेखक रहे हैं. उन्होंने अपने जीवनकाल में कई महत्वपूर्ण रचनाएँ प्रकाशित की, जिन्होंने उन्हें साहित्य की दुनिया में मशहूरी दिलाई.

नागार्जुन की कविताएँ

  • युगधारा – नागार्जुन की इस रचना में उन्होंने समाज के अन्याय और सामाजिक मुद्दों को गहराई से छूने का प्रयास किया. यह कविता उनकी सामाजिक चिंतन को प्रकट करती है और समाज के प्रति उनकी सहानुभूति को दर्शाती है.
  • सतरंगे पंखों वाली (1949) – यह एक और महत्वपूर्ण कविता है जिसमें नागार्जुन ने स्वतंत्रता संग्राम के आत्मा को महत्वपूर्ण रूप से व्यक्त किया है. इसमें वे स्वतंत्रता संग्राम के शीर्षकों को सतरंगे पंखों के साथ जोड़ते हैं.
  • प्यासी पथराई आँखें (1962) – इस रचना में नागार्जुन ने अपनी गंभीर दृष्टिकोण के साथ समाज के असमानता और दुख को चित्रित किया है.
  • तालाब की मछलियाँ (1974) – यह उनका एक प्रमुख काव्य ग्रंथ है जिसमें वे प्राकृतिक सौंदर्य को चित्रित करते हैं और मानवीय जीवन की अद्वितीयता को उजागर करते हैं.
  • तुमने कहा था (1980) – इस रचना में नागार्जुन ने प्रेम और जीवन के संवाद को उद्घाटित किया है. इसके माध्यम से उन्होंने रिश्तों की महत्वपूर्ण बातें बताई हैं.
  • खिचड़ी विप्लव देखा हमने (1980) – यह रचना उनके व्यंग्यपूर्ण दृष्टिकोण को प्रकट करती है और समाज में हो रहे बदलाव को चुनौती देती है.
  • हजार-हजार बाँहों वाली (1981) – इस कविता में नागार्जुन ने मानवीय बंधनों की महत्वपूर्ण बातें प्रस्तुत की हैं.
  • पुरानी जूतियों का कोरस (1982) – इस रचना में वे पुराने समय की यादों को चित्रित करते हैं और समय के साथ हो रहे परिवर्तन को व्यंग्यपूर्ण तरीके से दिखाते हैं.
  • रत्नगर्भ (1984) – यह एक प्रमुख कविता है जिसमें वे धार्मिक और आध्यात्मिक मुद्दों पर विचार करते हैं.
  • से भी हम क्या ! ऐसे भी तुम क्या ! (1985) – इस कविता में नागार्जुन ने व्यक्तिगत अनुभवों को बताया है और व्यक्तिगतता की महत्वपूर्ण बातें प्रस्तुत की हैं.
  • आखिर ऐसा क्या कह दिया मैंने (1986) – इस रचना में वे अपने भावनाओं को बयां करते हैं और अपने विचारों को साहित्य के माध्यम से प्रकट करते हैं.
  • इस गुब्बारे की छाया में (1990) – इस कविता में नागार्जुन ने समय के गुजरने के साथ होने वाले परिवर्तन को दर्शाया है.
  • भूल जाओ पुराने सपने (1994) – इस रचना में वे युवाओं के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन प्रदान करते हैं.
  • अपने खेत में (1997) – इस कविता में वे ग्रामीण जीवन की महत्वपूर्ण बातें बताते हैं और प्राकृतिक जीवन के सौंदर्य को चित्रित करते हैं.

नागार्जुन के उपन्यास

नागार्जुन का उपन्यास इनमें से सभी है. निचे लिखी हुई सभी उपन्यास नागार्जुन के द्वारा ही रचित उपन्यास है जोकि बहुत प्रसिद्ध है.

  • रतिनाथ की चाची – इस उपन्यास में नागार्जुन ने एक गाँव के सामाजिक संरचना और मानवीय दुख-दर्द को चित्रित किया है. उन्होंने गाँव के अलग-अलग परिप्रेक्ष्यों में घटने वाले घटनाओं का वर्णन किया है और उनके प्रमुख पात्रों के संघर्षों को दिखाया है.
  • बलचनमा – यह उपन्यास एक छोटे से गाँव के बच्चे बलचनमा के जीवन की कहानी है. बलचनमा की जिंदगी की विभिन्न मानवीय और सामाजिक पहलुओं को दर्शाने के साथ, यह कहानी एक छोटे गाँव के संघर्षों और सफलता की कहानी है.
  • नयी पौध – इस उपन्यास में नागार्जुन ने एक युवक की जीवन की कहानी को विवरणित किया है, जो नए अवसरों की तलाश में है. उन्होंने नए आत्मा-संवाद के माध्यम से व्यक्ति की आंतरिक खोज को प्रस्तुत किया है.
  • बाबा बटेसरनाथ – इस उपन्यास में नागार्जुन ने एक साधु के जीवन की रोचक कहानी को विवरणित किया है. बाबा बटेसरनाथ के आत्मा की खोज और समाज में उनके प्रेरणास्त्रोत को दिखाया गया है.
  • वरुण के बेटे – इस उपन्यास में नागार्जुन ने वरुण के बेटे के जीवन के रुख को चित्रित किया है. इसमें उन्होंने मानवीय जीवन की गहराईयों में होने वाले बदलावों और संघर्षों को प्रस्तुत किया है.
  • दुखमोचन – इस उपन्यास में नागार्जुन ने एक गरीब परिवार के सदस्यों के जीवन की कठिनाइयों को विवरणित किया है. वे इस कहानी के माध्यम से समाज में गरीबों की समस्याओं को उजागर करते हैं.
  • कुंभीपाक – इस उपन्यास में नागार्जुन ने व्यक्ति के आत्मा के आंदर छिपी मानवीय भावनाओं को दर्शाया है. कुंभीपाक की कहानी एक युवक के आंतरिक संघर्ष को व्यक्त करती है.
  • हीरक जयन्ती – इस उपन्यास में नागार्जुन ने एक प्रेम कहानी को चित्रित किया है, जिसमें प्रेम और समाज के दबाव के बीच जीवन के मुद्दे को प्रस्तुत किया गया है.
  • उग्रतारा – इस उपन्यास में नागार्जुन ने एक समाज में होने वाले बदलाव को चित्रित किया है और व्यक्ति की आत्मा के सफर को दर्शाया है.
  • जमनिया का बाबा – इस उपन्यास में नागार्जुन ने एक संत के जीवन की रोचक कहानी को प्रस्तुत किया है, जिसमें उन्होंने धार्मिकता और मानवता के महत्व को बताया है.
  • गरीबदास – इस उपन्यास में नागार्जुन ने एक गरीब परिवार के सदस्यों के जीवन की कठिनाइयों को विवरणित किया है और समाज में गरीबों के संघर्ष को दिखाया है.

नागार्जुन के काव्य

  • भस्मांकुर (खंडकाव्य 1970) – ‘भस्मांकुर’ नागार्जुन के महत्वपूर्ण काव्य कृतियों में से एक है. इस काव्य में वे व्यक्तिगत और सामाजिक विषयों पर अपने दृष्टिकोण को प्रकट करते हैं और समाज के अन्याय के खिलाफ आवाज उठाते हैं. ‘भस्मांकुर’ नागार्जुन के साहित्यिक और सामाजिक प्रतिस्पर्धा को प्रकट करता है और उनके कविता कला को उच्चतम स्तर पर प्रस्तुत करता है.
  • भूमिजा – ‘भूमिजा’ भारतीय साहित्य में एक महत्वपूर्ण काव्य है, जिसमें नागार्जुन ने प्राकृतिक और मानवीय दृष्टिकोण को व्यक्त किया है. इस काव्य में उन्होंने प्रकृति के सौंदर्य को चित्रित किया है और मानवीय जीवन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाया है. ‘भूमिजा’ एक गहरा और प्रभावशाली काव्य है, जो नागार्जुन की कविता कला के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को प्रकट करता है.

संस्मरण

  • एक व्यक्ति: एक युग (1963) – यह किताब नागार्जुन के जीवन और युग के बारे में है, जिसमें उन्होंने अपने समय के साथ साथ अपने व्यक्तिगत अनुभवों को साझा किया है.

कहानी संग्रह

  • आसमान में चन्दा तैरे (1962) – इस संग्रह में नागार्जुन की विभिन्न कहानियाँ हैं, जो विविध विषयों पर आधारित हैं. इसमें वे अपने कल्पनाशीलता और कथाओं के माध्यम से पढ़ने वालों को मनोरंजन और सोचने पर विचार करने का मौका देते हैं.

आलेख संग्रह

  • अन्नहीनम् क्रियाहीनम् (1983) – इस संग्रह में नागार्जुन के विभिन्न आलेख हैं, जिनमें वे समाज और साहित्य के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार प्रस्तुत करते हैं.
  • बम्भोलेनाथ (1989) – इस संग्रह में नागार्जुन ने बम्भोलेनाथ के जीवन और उनके साहित्यिक कार्यों पर आलेख लिखा है.

नागार्जुन का बाल साहित्य

  • कथा मंजरी भाग 1 (1948) – इस पुस्तक में नागार्जुन ने बच्चों के लिए कहानियाँ लिखी हैं, जो उनके बचपन के अनुभवों पर आधारित हैं.
  • कथा मंजरी भाग 2 (1958) – इस पुस्तक में भी नागार्जुन ने बच्चों के लिए मनोरंजनीय कहानियाँ लिखी हैं, जो उनके विचार और दृष्टिकोण को प्रकट करती हैं.
  • मर्यादा पुरुषोत्तम राम (1955) – इस पुस्तक में नागार्जुन ने भगवान राम के जीवन की कहानी को रचा है, जिसमें वे धार्मिकता और मानवीय मूल्यों को बताते हैं.
  • विद्यापति की कहानियाँ (1964) – इस पुस्तक में नागार्जुन ने विद्यापति की कहानियों का अनुवाद और विशेष टिप्पणियाँ दी हैं.

नागार्जुन की मैथिली रचनाएँ

  • चित्रा (कविता-संग्रह: 1949) – ‘चित्रा’ मैथिली कविताओं का एक संग्रह है, जिसमें नागार्जुन ने मैथिली भाषा में अपने कविताओं को प्रकट किया है.
  • पत्रहीन नग्न गाछ (1967) – इस पुस्तक में नागार्जुन ने मैथिली कविताओं का संग्रह किया है, जिसमें वे अपने समय के मानवीय और सामाजिक मुद्दों पर अपने कविताओं के माध्यम से अपने विचार व्यक्त करते हैं.
  • पका है यह कटहल (1994) – इस पुस्तक में नागार्जुन ने मैथिली कविताओं का संग्रह किया है, जिनमें वे अपने साहित्यिक और सामाजिक दृष्टिकोण को प्रकट करते हैं.
  • पारो (उपन्यास: 1946) – ‘पारो’ नागार्जुन का मैथिली भाषा में लिखा उपन्यास है, जो एक युवक के जीवन के कई पहलुओं को दर्शाता है.
  • नवतुरिया (1954) – ‘नवतुरिया’ मैथिली भाषा में लिखा गया है और इसमें नागार्जुन ने मानवीय संवादों और भाषा की खूबसूरती को प्रकट किया है.

नागार्जुन की बाङ्ला रचनाएँ

  • मैं मिलिट्री का बूढ़ा घोड़ा (1997) – इस किताब में नागार्जुन ने अपने अनुभवों और विचारों को बाङ्ला भाषा में लिखा है.

पुरस्कार एवं सम्मान

नागार्जुन के साहित्यिक योगदान को मान्यता देने के लिए उन्हें कई महत्वपूर्ण पुरस्कार और सम्मान से नवाजा गया है. इन पुरस्कारों और सम्मानों के माध्यम से उनका काव्य, गद्य, और साहित्यिक योगदान समाज में महत्वपूर्ण मान्यता प्राप्त किया है.

  1. साहित्य अकादमी पुरस्कार (1969) – नागार्जुन को मैथिली भाषा में लिखे गए ‘पत्र हीन नग्न गाछ’ के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस पुरस्कार से उनकी लेखनी को और भी मान्यता मिली और उनका योगदान साहित्य क्षेत्र में अद्वितीय बन गया.
  2. भारत भारती सम्मान – उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान, लखनऊ द्वारा नागार्जुन को भारत भारती सम्मान से सम्मानित किया गया. यह सम्मान उनके साहित्यिक योगदान की प्रमुखता को प्रमोट करने के लिए प्रदान किया गया.
  3. मैथिलीशरण गुप्त सम्मान – मध्य प्रदेश सरकार ने नागार्जुन को मैथिलीशरण गुप्त सम्मान से नवाजा. इस सम्मान से उनके लिखे गए मैथिली काव्य और गद्य का महत्वपूर्ण योगदान मान्यता मिला.
  4. राजेन्द्र शिखर सम्मान (1994) – बिहार सरकार ने नागार्जुन को राजेन्द्र शिखर सम्मान से सम्मानित किया, जिससे उनके भाषा और साहित्य क्षेत्र में किए गए योगदान की प्रमुखता को पुनर्विचार किया गया.
  5. राहुल सांकृत्यायन सम्मान – पश्चिम बंगाल सरकार ने नागार्जुन को राहुल सांकृत्यायन सम्मान से सम्मानित किया, जिससे उनके योगदान को और भी प्रमोट किया गया और साहित्यिक समुदाय में उन्हें महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त हुआ.

इन पुरस्कारों और सम्मानों से साबित होता है कि नागार्जुन एक महान साहित्यकार थे और उनका योगदान साहित्य जगत में महत्वपूर्ण है. उन्होंने अपने लेखनी से मैथिली, बाङ्ला, और हिंदी भाषाओं में उत्कृष्ट काव्य और गद्य रचनाएँ प्रस्तुत की और साहित्य क्षेत्र को एक नई दिशा दी. उनके साहित्यिक योगदान को समर्थन देने के लिए उन्हें ये पुरस्कार और सम्मान प्राप्त हुए.

नागार्जुन की काव्य भाषा – शैली

नागार्जुन की भाषा शैली हिन्दी, मैथिली, बंगाली, संस्कृत, और उनकी अपनी खुद की शैली है, जो सरल, स्पष्ट, और मार्मिक है. उनके लेखन में भाषा का उपयोग विशेषज्ञता से किया गया है, जिससे पाठकों को सहजता से समझने में मदद मिलती है.

उनके काव्य और गद्य रचनाओं में उन्होंने जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं को स्पष्ट तरीके से प्रकट किया है और अपनी भाषा के माध्यम से समाज के मुद्दे पर चर्चा की है. उनके गीतों में जन-जीवन की सामान्यता का संगीत व्याप्त है, जो उनके पढ़ने वालों के दिलों तक पहुंचता है और उन्हें सोचने पर मजबूर करता है. नागार्जुन की भाषा शैली में सरलता, सुन्दरता, और गहराई होती है, जिससे उनके काव्य का प्रभाव और महत्व बढ़ जाता है.

नागार्जुन की काव्यगत विशेषताएँ

नागार्जुन जी की काव्यगत विशेषताएँ में उनकी काव्य भाषा सरल, सरस, व्यावहारिक, और प्रभावशाली है. उन्होंने अपनी रचनाओं में तत्सम और तद्भव दोनों शब्दों का प्रयोग किया है और इससे उनकी भाषा बड़ी प्रभावी है. इसके अतिरिक्त कुछ और काव्य विशेषताएँ निम्नलिखित है –

अलंकारों का प्रयोग  

उन्होंने अपनी रचनाओं में अनुप्रास, उपमा, रूपक, और अतिशयोक्ति अलंकारों का सवाल और बड़े ही सुंदरता से किया है, जिससे उनकी कविताओं का अद्वितीय और आकर्षक रूप होता है.

भाव पक्ष

नागार्जुन जी की कविताओं में भावनाओं का महत्वपूर्ण स्थान है. उन्होंने अपने काव्य के माध्यम से जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं को सुंदरता के साथ प्रस्तुत किया है और उनकी भाषा से समाज के मुद्दों का विचार किया है.

कला पक्ष

उनकी सरल और बोलचाल की भाषा में जटिल भावों का सुंदर व्यक्ति करने का कला अत्यधिक प्रशंसा प्राप्त करता है. उन्होंने अपनी कविताओं में वीर और वात्सल्य रस को प्रमुख रूप से प्रकट किया है और उनके गीतों की गायन शैली में भावनाओं को स्वर दिया है.

निष्कर्ष

प्रिय छात्रो आज हम लोगो ने बहुत ही अच्छे तरीके से Nagarjun Ka Jivan Parichay को समझा है और जाना है. हम लोगो ने नागार्जुन का जीवन परिचय का एक पीडीऍफ़ फाइल भी देखा है जिसके अंदर जीवनी एवं साहित्यिक परिचय तथा उनकी रचनाये भी शामिल थी.

नागार्जुन की जीवन भी बहुत ही कठिन संघर्षो से गुजरा है. शुरू से ही इनकी रूचि काव्य में रही है यही वजह है की ये आगे चलकर एक महान कवि साबित हुए है. आप सभी लोग इनके जीवनी से एक प्रेणादायक स्रोत ले सकते है और आप सभी लोग भी अपने जीवन में कुछ बड़ा करने का साहस रख सकते है.

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FAQs

प्रश्न: नागार्जुन किस धारा के कवि थे उनका पूरा नाम क्या था?

उत्तर: नागार्जुन प्रगतिशील विचार धारा के कवि थे और उनका पूरा नाम बैधनाथ मिश्र है परन्तु उन्होंने अपनी रचनाओ के लिए नागार्जुन नाम का प्रयोग किया है.

प्रश्न: नागार्जुन की प्रमुख रचनाएं कौन कौन सी है?

उत्तर: नागार्जुन की प्रमुख रचनाये ‘युगधारा’, ‘सतरंगें पंखों वाली’ एवं ‘ तालाब की मछलियां’ आदि है.

प्रश्न: नागार्जुन कौन थे इन हिंदी?

उत्तर: नागार्जुन एक महान भारतीय कवि और साहित्यिक थे. वे मैथिली और हिंदी भाषा के प्रमुख कवि में से एक थे और उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज के विभिन्न मुद्दों को प्रकट किया था. उनका पूरा नाम नागेश्वर नाथ था.

प्रश्न: नागार्जुन की एक प्रसिद्ध कृति क्या है?

उत्तर: नागार्जुन की एक प्रसिद्ध कृति “युगधारा” है. यह कृति उनकी लघुकाव्य रचना में से एक है और इसमें समाज, राजनीति, और मानवता के मुद्दे पर चर्चा की गई है.

प्रश्न: नागार्जुन की मृत्यु कब हुई थी?

उत्तर: कवि नागार्जुन की मृत्यु 5 नवम्बर सन् 1998 ई० में दरभंगा जिला बिहार में हुई थी.

प्रश्न: नागार्जुन के कवि हैं

उत्तर: नागार्जुन आधुनिक काल के कवि है.

प्रश्न: नागार्जुन की दो रचनाएं

उत्तर: नागार्जुन की दो प्रसिद्ध रचनाएं इस प्रकार हैं:
1. “युगधारा” – यह कृति उनकी लघुकाव्य रचना में से एक है और इसमें समाज, राजनीति, और मानवता के मुद्दे पर चर्चा की गई है.
2. “सतरंगे पंखों वाली” – यह कविता उनकी काव्य रचना में से एक है और इसमें प्रकृति, स्वतंत्रता, और भारतीय समाज के विभिन्न पहलुओं पर गहरा विचार किया गया है.

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