[कक्षा 10th] रामनरेश त्रिपाठी का जीवन परिचय

5/5 - (3 votes)

इस लेख में रामनरेश त्रिपाठी का जीवन परिचय जानेंगे. रामनरेश त्रिपाठी का जन्म 4 मार्च 1889 ईस्वी को उत्तर प्रदेश राज्य के सुल्तानपुर जिले में हुआ था.

जैसा कि आप लोग जानते हैं की कक्षा 10th हिंदी विषय में Ramnaresh Tripathi Ka Jivan Parichay पूछा जाता है. इसलिए मैं आज आप लोगों को इनके जीवन परिचय के साथ साहित्यिक परिचय, रचनाएं और भाषा शैली के बारे में बताने वाला हूं.

यदि आप इस आर्टिकल को पूरे अंत तक पढ़ते हैं तो मैं पूरे गारंटी के साथ कर सकता हूं कि यह आपको याद हो जाने वाले हैं, क्योंकि मैं अपने हाई स्कूल की परीक्षा में इसी जीवन परिचय को याद करके अच्छा मार्क्स लाए थे.

आपको सबसे पहले रामनरेश त्रिपाठी जी की जीवन परिचय का मुख्य बिंदु को जान लेना चाहिए, जो कि मैं नीचे टेबल के माध्यम से आप लोगों को समझाया है.

कवि का नामरामनरेश त्रिपाठी
जन्म वर्ष4 मार्च 1889 ईस्वी
जन्म स्थानयूपी राज्य के सुल्तानपुर जिले के कोइरीपुर में
मृत्यु वर्ष16 जनवरी 1962 ईस्वी में
मृत्यु स्थानप्रयागराज में
आयु72 वर्ष
पिता जी का नामपण्डित रामदत्त त्रिपाठी जी
माता जी का नामअज्ञात
पेशाकवि एवं नाटकार
कालआधुनिक
युगपूर्व छायावाद
भाषाखड़ीबोली एवं संस्कृत
शैलीचित्रात्मक एवं उपदेशात्मक
पुरस्कारहिन्दुस्तान अकादमी पुरस्कार से सम्मानित
साहित्य में स्थानत्रिपाठी जी ग्राम गीतों का संकलन करने वाले हिंदी के प्रथम कवि के रूप में
प्रमुख रचनायेपथिक, मिलन, स्वप्न, मानसी, कविता कौमुदी, बा और बापू आदि.

आप लोग ऊपर टेबल के माध्यम से रामनरेश त्रिपाठी का जीवन परिचय संक्षिप्त रूप में पढ़ लिया है. अब आगे हम रामनरेश त्रिपाठी जीवन परिचय को बारीकी से पढेंगे.

Table of Contents

रामनरेश त्रिपाठी का जीवन परिचय

रामनरेश त्रिपाठी का जन्म 4 मार्च 1889 ईस्वी में उत्तर प्रदेश राज्य के सुल्तानपुर जिले अंतर्गत कोइरीपुर गांव में एक साधारण कृषक परिवार में हुआ था. इनके पिता का नाम पंडित राम दत्त त्रिपाठी था जोकि एक आस्तिक ब्राह्मण थे.

इनकी प्रारम्भिक शिक्षा गाव से ही सम्पन्न हुई थी. रामनरेश त्रिपाठी अपने नौवीं कक्षा तक की पढ़ाई की थी और उसके बाद इन्होंने अपनी दसवीं की पढ़ाई पूरी करने के लिए जौनपुर गए थे परंतु वह अपनी पढाई पूरी नहीं कर पाए थे.

रामनरेश त्रिपाठी जी ने साहित्य साधना को ही अपने जीवन का लक्ष्य बनाया. इन्हें हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, बांग्ला, गुजराती भाषाओं का भी अच्छा ज्ञान था. रामनरेश त्रिपाठी जी ने हिंदी भाषाओं का प्रचार – प्रसार का सराहनीय कार्य भी किये.

त्रिपाठी जी एक स्वतंत्रता सेनानी और देश के सेवक भी थे. हिंदी साहित्य की सेवा में सैदव तत्पर रहने वाले रामनरेश त्रिपाठी जी की मृत्यु 16 जनवरी 1962 ईस्वी में प्रयागराज में हो गयी थी.

मुझे उम्मीद है कि अब आप लोगों को “रामनरेश त्रिपाठी का जीवन परिचय” काफी अच्छे से समझ में आ गया है. अब आगे हम लोग त्रिपाठी जी के कुछ अन्य परिचय के बारे में जानेंगे.

इसे भी पढ़े: महत्वपूर्ण जीवन परिचय कक्षा 10th हिन्दी

रामनरेश त्रिपाठी का जीवन परिचय PDF

प्रिय छात्रों यदि आप जो रामनरेश त्रिपाठी का जीवन परिचय PDF फाइल को डाउनलोड करना चाहते हैं, तो चलिए अब हम इसके बारे में जान लेते हैं.

यदि आप लोग कक्षा 10 में पढ़ते हैं तो Ramnaresh Tripathi Ka Jivan Parichay आपका बोर्ड एग्जाम में लिखने के लिए भी आता है और आपको नोट्स भी बनाने होते हैं.

रामनरेश त्रिपाठी का जीवन परिचय PDF
रामनरेश त्रिपाठी का जीवन परिचय PDF

इसके लिए आपको त्रिपाठी जी का जीवन परिचय पीडीएफ फाइल की आवश्यकता होती है जिसके मदद से आप अपने नोट्स को बहुत ही आसानी से बेहतरीन तरीके से बना पाए.

आपको नीचे पीडीएफ पढ़ने के लिए दिख रहा होगा आप चाहे तो डायरेक्ट इस लेख के माध्यम से भी पढ़ सकते हैं. इसके अतिरिक्त आप इस पीडीऍफ़ को डाउनलोड करके अपने मोबाइल ओपन करके नोट्स को बना करके पढ़ सकते हैं.

मुझे उम्मीद है कि आप लोगों ने पीडीएफ को अपने मोबाइल में भी सेव कर लिया है और अब आप लोग त्रिपाठी जी के जीवन परिचय का नोट्स बना सकते हैं.

रामनरेश त्रिपाठी का साहित्यिक परिचय

त्रिपाठी जी मननशील विद्वान और परिश्रमी थे. रामनरेश त्रिपाठी जी ने हिन्दी के प्रचार प्रसार और साहित्य सेवा की भावना से प्रेरित होकर हिंदी मंदिर की स्थापना की थी.

त्रिपाठी जी ने अपनी कृतियों का प्रकाशन भी स्वयं ही किया था. रामनरेश त्रिपाठी द्विवेदी युग के उन साहित्यकारों में से एक है जिन्होंने द्विवेदी मंडल के प्रभाव से पृथक रहकर अपनी मौलिक प्रतिभा से साहित्य के क्षेत्र में कई कार्य किये.

रामनरेश त्रिपाठी जी भाव प्रधान काव्य की रचना की थी. त्रिपाठी जी ने राष्ट्रीयता, देश प्रेम, सेवा त्याग आदि भावना प्रधान विषयों पर उत्कृष्ट साहित्य की रचना की थी.

रामनरेश त्रिपाठी की प्रमुख रचनाएं

रामनरेश त्रिपाठी की प्रमुख रचनाएं पथिक, मिलन और स्वप्न है. त्रिपाठी जी की स्वप्न रचना पर इन्हें हिंदुस्तान अकादमी पुरस्कार से भी नवाजा गया था. त्रिपाठी जी द्वारा लिखा गया पहला हिंदी एकांकी नाटक ‘बा और बापू’ है.

त्रिपाठी जी की आप रचनाओं को कुछ इस प्रकार से भी लिख सकते हैं जैसा कि मैं नीचे आपको लिख करके दिखाया है.

  • कहानी: आंखों देखी कहानी, उन बच्चों का क्या हुआ, सपनों के चित्र
  • उपन्यास: वीरांगना, मारवाड़ी और पिशाचिनी
  • नाटक: जयंत, प्रेमलोक, बा और बापू
  • मुक्तक: मानसी, कविता विनोद
  • अनुवाद: इतना तो जानो, कौन जागता है

इसके अतिरिक्त रामनरेश त्रिपाठी जी ने तुलसी जी द्वारा रचित श्री रामचरितमानस जैसी पुस्तकों का संपादन का कार्य भी इन्होंने किया है.

रामनरेश त्रिपाठी की भाषा शैली

रामनरेश त्रिपाठी जी ने अपनी रचनाओं में शुद्ध हिंदी खड़ी बोली भाषाओं का प्रयोग किया है. इसके साथ ही उनके रचनाओं में उर्दू और संस्कृत का भी प्रयोग दिखता है.

इनका काव्य वर्णनात्मक, उपदेशात्मक एवं चित्रात्मक शैली की थी. इन्होंने छंदों एवं अलंकारों का सटीक प्रयोग कर अपने रचनाओं को और मधुर मनमोहक बनाया था.

त्रिपाठी जी ने अपने रचनाओं में हास्य रस, करुण रस, श्रृंगार रस जैसी रसों का प्रयोग करके अपने काव्यो को दशक के नजर में सुंदर और आकर्षित तरीके से लिखा था.

रामनरेश त्रिपाठी का साहित्य में स्थान

रामनरेश त्रिपाठी जी का साहित्य में बहुत ही विशेष स्थान रहा है, क्योंकि इन्होंने हिंदी में अनेकों रचनाएं करके साहित्य को योगदान के रूप में समर्पित कर दिया है.

त्रिपाठी जी ग्राम गीतों का संकलन करने वाले पहले ऐसे कवि थे जिसने कविता कौमुदी जैसे रचनाएं करके साहित्य के क्षेत्र में अपना नाम कमाया.

रामनरेश त्रिपाठी जी की साहित्य साधना फतेहपुर से शुरुआत हुई थी. अपने शुरुआती दिनों में त्रिपाठी जी ने छोटे-मोटे काव्य संग्रह सामाजिक उपन्यास जैसे रचनाओं की थी.

रामनरेश त्रिपाठी का जीवन परिचय का विडियो लेक्चर

FAQs: रामनरेश त्रिपाठी का जीवन परिचय से सम्बन्धित

रामनरेश त्रिपाठी का जीवन परिचय से संबंधित कुछ ऐसे प्रश्नों को हम अभी जानने वाले हैं जो कि अक्सर आप लोगों के द्वारा पूछी जाती है

अक्सर पूछे जाने वाले सभी रामनरेश त्रिपाठी के प्रश्न उत्तर मैंने नीचे दे दिया है. इसके अतिरिक्त यदि आपके मन में त्रिपाठी जी के जीवनी से संबंधित अन्य कुछ प्रश्न है तो नीचे कमेंट करके हमसे पूछ सकते हैं मैं आपको उसका उत्तर दे दूंगा.

प्रश्न: रामनरेश त्रिपाठी का जन्म कब हुआ था?

उत्तर: रामनरेश त्रिपाठी का जन्म 4 मार्च सन 1889 ईस्वी में यूपी राज्य के सुल्तानपुर जिले में हुआ था.

प्रश्न: रामनरेश त्रिपाठी का मृत्यु कब हुआ था?

उत्तर: रामनरेश त्रिपाठी की मृत्यु उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 72 वर्ष की आयु में 16 जनवरी सन 1962 ईस्वी में हो गया था.

प्रश्न: रामनरेश त्रिपाठी की माता का नाम?

उत्तर: रामनरेश त्रिपाठी की माता का नाम का कोई साक्ष्य प्राप्त नहीं है इसलिए इनका नाम अभी भी अज्ञात है.

प्रश्न: रामनरेश त्रिपाठी जी की रचना क्या है?

उत्तर: रामनिवास त्रिपाठी जी की रचना पथिक, मिलन, स्वप्न और मानसी आदि है

प्रश्न: मानसी के लेखक कौन है?

उत्तर: मानसी के लेखक रामनरेश त्रिपाठी जी है इनके द्वारा ही मानसी की रचना की गई थी.

प्रश्न: रामनरेश त्रिपाठी द्वारा लिखित खंडकाव्य कौन सा नहीं है?

उत्तर: रामनरेश त्रिपाठी जी द्वारा लिखित मानसी एक खंड काव्य नहीं है. आपके प्रश्न पेपर में कोई चार ऑप्शन आएगा और मानसी खंडकाव्य नहीं है

प्रश्न: रामनरेश त्रिपाठी की दो रचनाएं?

उत्तर: रामनरेश त्रिपाठी की दो रचनाएं स्वप्न और पथिक है.

प्रश्न :राम नरेश त्रिपाठी की कविताएँ?

उत्तर: रामनरेश त्रिपाठी की कविताएं ‘पथिक’ और ‘वह देश कौन सा है’ आदि है.

प्रश्न: रामनरेश त्रिपाठी किस युग के कवि हैं?

उत्तर: रामनरेश त्रिपाठी पूर्व छायावाद युग के कवि है जिन्होंने साहित्य के क्षेत्र में अपने रचनाओं से नाम कमाया है.

निष्कर्ष

अब मैं पूरे दादा के साथ कर सकता हूं कि आप रामनरेश त्रिपाठी का जीवन परिचय बहुत ही अच्छे से समझ में आ गया है क्योंकि मैंने इतनी आसानी से आपको समझाया है.

यदि आप लोग रामनरेश त्रिपाठी जी के जीवनी को अपने अन्य मित्रों के साथ ही शेयर करना चाहते हैं तो उनको शेयर जरूर करें.

रामनरेश त्रिपाठी जी हिंदी के प्रथम ऐसे कवि थे जिन्होंने ग्राम गीतों का संकलन किया था. इसके अतिरिक्त त्रिपाठी जी को उनकी रचना स्वप्न पर इन्हें हिंदुस्तानी अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था.

प्रिय स्टूडेंट्स, मेरा नाम आशीर्वाद चौरसिया है और मैंने हिन्दी विषय से स्नातक भी किया है। आपको इस ब्लॉग पर हिन्दी से जुड़े सभी तरह के जानकारिय मिलेगी। इसके अतिरिक्त आपको सभी क्लासेज की नोट्स एवं विडियो लेक्चर हमारे NCERT eNotes YouTube चैनल पर मिल जाएगी।

SHARE ON:

Leave a Comment