[PDF] रसखान का जीवन परिचय – Raskhan Ka Jivan Parichay Class 9th, 10th

5/5 - (2 votes)

क्या आप लोग ‘Raskhan Ka Jivan Parichay’ के बारे में जानना चाहते है? तो आप बिलकुल सही जगह पर आये है. हम लोग रसखान का जीवन परिचय को विस्तार से जानने वाले है.

इस लेख को अंत तक पढ़िए आपको मैं यकीं दिलाता हु की रसखान का जीवन परिचय एवं साहित्य रचना आदि के बारे में अच्छे से जान जायेंगे.

हम लोग रसखान के जन्म से लेकर मृत्यु तक की हर चीज को अच्छे से समझेंगे. उसके पहले हम लोग Raskhan Ka Jivan Parichay Short Mein एक टेबल के माध्यम से एक नजर इनकी जीवनी के बारे में देखेंगे.

नामरसखान
वास्तविक नामसैयद इब्राहीम
पिता जी का नामगनेखां
माता जी का नाममिश्री देवी
जन्म वर्षसन् 1533 ई०
जन्म स्थानदिल्ली
गुरु का नामगुसाई विट्ठलनाथ
भक्तिकृष्ण जी की भक्ति
प्रमुख रचनाये‘सुजान रसखान’ एवं ‘प्रेमवाटिका’
भाषाब्रजभाषा
शैलीमुक्तक शैली
उपाधि‘रसखान’ जोकि एक संज्ञा की उपाधि दि गयी है
मृत्यु वर्षसन् 1618 ई०
मृत्यु स्थानवृन्दावन

विस्तार से जानिए ‘Raskhan Ka Jivan Parichay’ के बारे में

रसखान का जीवन परिचय: कृष्णभक्त प्रमुख मुस्लिम कवि रसखान को हिंदी साहित्य और ब्रज भाषा से गहरा लगाव था. विद्वान उनका मूल नाम सैयद इब्राहीम मानते हैं.

वर्ष 1533 ई. में दिल्ली में जन्मे रसखान सगुण काव्य के कृष्ण-भक्ति वंश के एक प्रतिष्ठित कवि थे. उन्हें अक्सर दिल्ली के पठान सरदार के रूप में जाना जाता है.

जबकि कुछ विद्वानों का अनुमान है कि वह पिहानी का निवासी रहा होगा, लेकिन इस दावे का समर्थन करने के लिए कोई निर्णायक सबूत नहीं है.

उनके जीवन का विवरण रहस्य में डूबा हुआ है, विशेषकर उनके जन्मस्थान के संबंध में, जो विद्वानों के बीच असहमति का विषय बना हुआ है.

हालाँकि, उनके काम “प्रेमवाटिका” के सुराग दिल्ली के साथ उनके मजबूत संबंध का सुझाव देते हैं, जो संभवतः शाही वंश से उपजा है. जैसा कि “प्रेमवाटिका” में दर्शाया गया है, रसखान की वंशावली इन पंक्तियों से स्पष्ट होती है:

"देखि गदर हित साहिबी, दिल्ली नगर मसान। छिनहिं बादसा वंश की, उसक छोरि रसखान ॥"

रसखान गुसाईं विट्ठलनाथ के शिष्य बन गए और दिन-रात भगवान कृष्ण की भक्ति में समर्पित हो गए. उन्होंने गोवर्धन धाम (गोकुल) की यात्रा की और अपना जीवन भगवान कृष्ण के भक्ति गायन और पूजा में डूबा हुआ बिताया.

कहा जाता है कि रसखान की अटूट कृष्ण भक्ति से प्रभावित होकर गोस्वामी विट्ठलनाथजी ने उन्हें अपने शिष्य के रूप में स्वीकार कर लिया था.

गोस्वामी विट्ठलनाथजी के मार्गदर्शन में, रसखान ने वल्लभ संप्रदाय के भीतर पुष्टि मार्ग को अपनाया, जिससे उनका सांसारिक प्रेम भगवान कृष्ण के प्रति गहन, अलौकिक प्रेम में बदल गया.

उनकी काव्यात्मक विरासत “प्रेमवाटिका” (1614 ई.) के साथ समाप्त होती है, जो उनके अंतिम कार्य का प्रतीक है. कहा जाता है की संभवतः कुछ वर्षों बाद ही सन् 1618 ई० में रसखान का मृत्यु हो गया था.

रसखान का जीवन परिचय हिंदी में PDF

प्यारे मित्रो अब हम लोग रसखान का जीवन परिचय हिंदी में PDF का एक व्यूव देखेंगे जिसमे रसखान का सबसे सरल भाषा में शोर्ट में जीवन परिचय मिलेगा.

इस पीडीऍफ़ में आपको रसखान का जीवन परिचय के साथ साहित्यिक परिचय एवं उनकी रचनाये भी शामिल होंगे.

आपको उपर Raskhan Ka Jivan Parichay PDF का व्यूव दिख रहा होगा. कभी कभी वह पर एक बॉक्स नजर आएगा जिसमे आपको टिक करके पहले बताना होगा की आप एक रोबोट नही है उसके बाद पीडीऍफ़ दिखना शुरू होगा.

यह पीडीऍफ़ फाइल गूगल ड्राइव से एम्बेडेड पीडीऍफ़ है जिसे आप आसानी से इस ब्लॉग के माध्यम से पढ़ सकते है बिना किसी विज्ञापन के.

रसखान का साहित्यिक परिचय

रसखान का साहित्यिक परिचय: रसखान की कविता का जन्म श्री कृष्ण के प्रति उनकी गहन भक्ति से हुआ था, क्योंकि उन्होंने खुद को पूरी तरह से परमात्मा में डुबो दिया था.

अरबी और फ़ारसी दोनों भाषाओं में पारंगत, उन्होंने काव्य और पिंगलशास्त्र के क्षेत्र में गहराई से प्रवेश किया.

उनकी कविता उनकी गहरी भावनात्मक गहराई का प्रतिबिंब थी, जो उनके छंदों में मिलन और अलगाव दोनों के सार को समाहित करती थी. कृष्ण के प्रति उनके अटूट प्रेम ने उन्हें मान्यता प्राप्त कवियों की श्रेणी में पहुंचा दिया.

अटूट समर्पण के साथ, उन्होंने कई कविताएँ लिखीं जिनमें कृष्ण को उनके बचपन की मासूमियत और उनकी युवावस्था के आकर्षक आकर्षण का चित्रण किया गया था.

रसखान ने कुशलतापूर्वक अपने छंदों को वैभव और गुणों से भर दिया जो कविता को परिभाषित करते हैं, उन्हें अनुग्रह, सरलता और मधुर शांति से भर दिया जो उनकी काव्य विरासत की पहचान बन गई.

रसखान का साहित्य आज भी भारतीय साहित्य के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में माना जाता है और उनकी कविताएँ भक्ति, प्रेम, और आत्मा के मामूली संवाद का महाकाव्य हैं.

उनकी रचनाएँ आज भी पठनीय हैं और लोगों को भगवान के प्रति अपनी गहरी भक्ति और प्रेम का अभिव्यक्ति करने के लिए प्रेरित करती हैं.

रसखान की प्रमुख रचनाएँ

प्रिय छात्रो अब हम लोग Raskhan Ki Rachnaye in Hindi में जानेंगे जोकि एक अंक में आपके एग्जाम में आना तय है. कभी कभी यह बहुविकल्पीय प्रश्नों में भी रसखान की रचनाये आ जाती है.

इसलिए आप लोग इनके रचनाओ को भी पढ़ कर जाईयेगा. रसखान की प्रमुख रचनाये निम्नलिखित है –

रसखान की साहित्यिक विरासत केवल दो रचनाओं के माध्यम से संरक्षित है: ‘सुजान रसखान’ और ‘प्रेमवाटिका’.

  1. ‘सुजान रसखान’ एक व्यापक संग्रह है, जिसमें कविता, दोहा, सोरठा और सवैये रूप शामिल हैं, जिसमें कुल 139 छंद शामिल हैं. इस कृति में, रसखान ने मुक्त छंद शैली में भक्ति और प्रेम के विषयों की खोज की है.
  2. ‘प्रेमवाटिका’ में संक्षिप्त 25 दोहे हैं. यह रचना प्रेम के गहन और पूर्णतः परिपक्व पहलुओं पर प्रकाश डालती है. रसखान की संपूर्ण कृति कृष्ण के प्रति अटूट भक्ति और ब्रज के प्रति अटूट स्नेह से ओत-प्रोत है.

रसखान की भाषा – शैली

प्रिय छात्रो चलिए अब हम लोग Raskhan ki Bhasha Shaili के बारे में जान लेते है. हम लोग जानेंगे की रसखान जी अपने काव्य कृतियों में किस भाषा अथवा शैली का पर्योग करते थे.

रसखान की भाषा शैली की विशेषताएँ:

रसखान की भाषा शैली भारतीय साहित्य के आदिकवि तुलसीदास के समकक्ष है, और उन्होंने अपनी काव्य रचनाओं में भगवान श्रीकृष्ण के प्रेम और भक्ति के भावनात्मक आदर्शों को व्यक्त किया.

उनकी भाषा शैली गीत, दोहा, और चौपाई के रूप में प्रमुख थी, और उन्होंने इन रचनाओं में सुंदर रसिकता का व्यापक उपयोग किया.

  • प्रेम और भक्ति: रसखान की भाषा शैली में भगवान के प्रति उनकी अद्वितीय प्रेम और भक्ति का प्रतिपादन होता है. उन्होंने श्रीकृष्ण के साथ गोपियों की भावनाओं को व्यक्त किया और उनके प्रेम की अत्यंत अद्भुत और अलौकिक भाषा से व्यक्ति किया.
  • सुंदर छन्द: रसखान की भाषा शैली में सुंदर छन्दों का अद्वितीय उपयोग होता है, जिससे उनकी कविताएँ सुन्दर और मनमोहक होती हैं. उन्होंने छन्दों के माध्यम से रसिकता को व्यक्त किया और सुनने वालों के दिल में भावनाओं की गहरी झलक प्रस्तुत की.
  • भक्ति और भावनाओं की व्यापकता: रसखान की भाषा शैली में भक्ति और भावनाओं की व्यापकता होती है. उन्होंने अन्याय, प्रेम, और दिव्यता के साथ जुड़े भावनाओं को सुंदरता से व्यक्त किया और उन्हें साहित्य के माध्यम से प्रस्तुत किया.

रसखान की भाषा शैली भारतीय साहित्य के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में मानी जाती है और उनकी कविताएँ आज भी भक्ति और काव्यप्रेमी लोगों के द्वारा पढ़ी जाती हैं.

Raskhan Ka Jivan Parichay Video Lecture

FAQs

प्रिय छात्रो जैसा की हम लोग हर लेख के अंत में कुछ सवालो का उत्तर जानते है उसी तरह हम लोग आज भी Raskhan Ka Jivan Parichay से सम्बंधित सवालो का उत्तर जानेंगे जोकि आप लोगो के ही द्वारा गूगल पर पूछी जाती है.

कबीर रसखान का जीवन परिचय?

रसखान एक प्रमुख हिंदी भक्ति काव्यकार थे जो 16वीं सदी में भारत में थे. उनका जन्म ब्रजभूमि में 1533 ईसा पूर्व के आस-पास हुआ था. रसखान अपने जीवन के दौरान भक्ति मार्ग का पालन करते हुए कृष्ण भक्ति में लिपटे रहे और उन्होंने अपने काव्य में कृष्ण के लीलाओं और गुणों की महिमा गाई.

रसखान का प्रमुख काव्य ग्रंथ “सूर सरवर” है, जिसमें वे भगवान कृष्ण के विभिन्न आयामों को उजागर करते हैं. उनके काव्य में प्रेम, भक्ति, और आत्मा के एकत्व के महत्व को महसूस किया जा सकता है.

रसखान का जीवन और काव्य हिंदी साहित्य के भक्ति और संत साहित्य का महत्वपूर्ण हिस्सा माने जाते हैं, और उनके रचनाएँ आज भी पठनीय हैं और भगवान कृष्ण के प्रति उनकी अद्वितीय भक्ति को दर्शाती हैं.

रसखान की मृत्यु कहाँ हुई?

रसखान की मृत्यु वृंदावन, भारत में हुई थी. वृंदावन एक प्रमुख हिंदू तीर्थ स्थल है और कृष्ण भगवान के लीलाओं के स्थल के रूप में प्रसिद्ध है.

रसखान ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा वृंदावन में गुजारा और वहीं उनकी मृत्यु हुई. उनकी यादें और उनका काव्य आज भी वृंदावन में उनकी स्मृति को सजीव रूप में बनाए रखते हैं.

रसखान की प्रमुख रचना कौन सी है?

रसखान की प्रमुख रचनाये ‘सुजान रसखान’ एवं ‘प्रेमवाटिका’ ही है. इनकी अभी तक मात्र दो ही रचनाये मिल पायी है.

रसखान की अंतिम रचना कौन सी है?

रसखान की अनितं रचना ‘प्रेमवाटिका’ है , इस रचना के कुछ ही साल बाद इनका निधन हो चूका था.

रसखान की पत्नी का नाम

रसखान की पत्नी अज्ञात थी. अर्थात इनकी पत्नी के बारे में विद्वानों को कुछ ज्ञात नहीं है.

रसखान का जन्म कहां हुआ था

रसखान का जन्म दिल्ली में हुआ था परन्तु इनके जन्म को लेकर मतभेत पैदा हुए है. कुछ विद्वानों का अनुमान है कि वह पिहानी का निवासी रहा होगा, लेकिन इस दावे का समर्थन करने के लिए कोई साक्ष्य सबूत नहीं है.

रसखान की मृत्यु कब हुई

रसखान की मृत्यु वृन्दावन में सन् 1618 ई० में हुई थी जोकि इनकी अंतिम रचना प्रेमवाटिका के बाद हुई.

Raskhan Kis Rajvansh mein Utpann Hue the

रसखान दिल्ली के पठान राजवंश में उत्पन्न हुए थे.इसलिए इन्हें दिल्ली का पठान भी कहा जाता था.

अंत में हमने क्या जाना

प्रिय छात्रो आज के हमने इस लेख में ‘Raskhan Ka Jivan Parichay’ को काफी विस्तार से जानने है. हमने रसखान का जीवन परिचय के साथ उनके रचनाये और भाषा शैली के बारे में भी जाना है. रसखान एक कृष्ण भक्त कवि थे जिनके बारे में हमने पढ़ चूका है.

हम लोगो ने रसखान का जीवन परिचय पीडीऍफ़ भी प्राप्त किया है जिसके मदद हम रसखान के जीवनी को आसानी से रिविजन कर सकते है.

आप लोग रसखान का जीवन परिचय को काफी अच्छे से तैयर कीजियेगा क्योंकि यह हर वर्ष बोर्ड के एग्जाम में आता है.

प्रिय स्टूडेंट्स, मेरा नाम आशीर्वाद चौरसिया है और मैंने हिन्दी विषय से स्नातक भी किया है। आपको इस ब्लॉग पर हिन्दी से जुड़े सभी तरह के जानकारिय मिलेगी। इसके अतिरिक्त आपको सभी क्लासेज की नोट्स एवं विडियो लेक्चर हमारे NCERT eNotes YouTube चैनल पर मिल जाएगी।

SHARE ON:

1 thought on “[PDF] रसखान का जीवन परिचय – Raskhan Ka Jivan Parichay Class 9th, 10th”

Leave a Comment