[PDF] यशपाल का जीवन परिचय – Yashpal Ka Jivan Parichay Class 10th

5/5 - (54 votes)

क्या आप भी Yashpal Ka Jivan Parichay के बारे में जानना चाहते है? तो इस लेख के अंत तक पढ़े. आपको जीवन परिचय, साहित्यिक परिचय एवं रचनाये आदि की pdf भी मिलेगी.

प्रिय छात्रो यदि आप लोग इस लेख को अंत तक पढ़ते है तो मैं पूरा यकीं के साथ कह सकता हु की आपको यशपाल का जीवन परिचय बहुत ही बेहतरीन तरीके से याद हो जाने वाली है. जिसे आप अपने कक्षा 10th के अलवा अन्य किसी भी एग्जाम में लिख सकते है.

मैंने आपको यशपाल का जीवन परिचय pdf भी दूंगा जिसके मदद से आप लोग अपने नोट्स की तैयार कर सकते है.

मैं आपको अंत में बताऊंगा की आप लोग कैसे यशपाल के जीवन परिचय का पीडीऍफ़ फाइल को डाउनलोड कर सकते है.

इसलिए आप लोग इस लेख को अंत तक पढ़े जिसमे मैं आपको यशपाल के जीवनी से जुड़े सभी चीजो को अच्छे से बताने वाला हु.

Table of Contents

संक्षिप्त में Yashpal Ka Jivan Parichay Class 10th

प्रिय छात्रो हम लोग पहले टेबल के मदद से Yashpal Ka Jivan Parichay को संक्षिप्त में जानेंगे जिसके मदद से आप लोग Class 10 के एग्जाम में बहुत ही आसानी से लिख सकते है.

यदि आप लोग इस टेबल को अच्छे से पढ़ लेते है तो आपको यशपाल का जीवन परिचय जिन्दगी में कभी नहीं भूलेगा.

पूरा नामयशपाल
जन्म वर्ष3 दिसमबर सन् 1903 ई०
जन्म स्थानफिरोजपुर छावनी पंजाब राज्य में
पिता जी का नामश्री हरी लाल जी
माता जी का नामश्रीमती प्रेमा देवी जी
पत्नी का नामज्ञात नही है
पुत्र/पुत्रीज्ञात नही है
पेशाउपन्यासकार, नाटकार एवं लेखक
कालआधुनिक काल
भाषाखड़ीबोली
शैलीसरल एवं वर्णात्मक
पुरस्कारपद्मभूषण, देव पुरस्कार, साहित्य अकदमी पुरस्कार आदि
प्रमुख रचनाये‘दादा कामरेड’, ‘देशद्रोही’, ‘झूठा सच’ एवं ‘मनुष्य के रूप’ आदि
आन्दोलनप्रगतिवाद
मृत्यु वर्ष26 दिसमबर सन् 1976 ई०
मृत्यु स्थानउत्तर – प्रदेश राज्य के वाराणसी जिले में

विस्तार से जानिए ‘Yashpal Ka Jivan Parichay’ के बारे में

यशपाल का जन्म 3 दिसम्बर सन 1903 ईस्वी को पंजाब के फिरोजपुर छावनी में हुआ था. यशपाल एक महान हिंदी साहित्यकार और क्रांतिकारी थे. उनके पिता जी का नाम श्री हरी लाल था और माता जी का नाम श्रीमती प्रेमा देवी था. 
वे एक प्रमुख उपन्यासकार, नाटककार, और लेखक थे जिन्होंने अपने लेखनी कौशल से भाषा को सरल और वर्णात्मक बनाया. उन्होंने कई प्रमुख पुरस्कार भी प्राप्त किए, जैसे कि पद्मभूषण, देव पुरस्कार, और साहित्य अकादमी पुरस्कार आदि. 
यशपाल ने प्रगतिवादी आन्दोलन के दौरान भी अपना योगदान दिया और उनकी मृत्यु 26 दिसम्बर 1976 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में हुई थी.

यशपाल का जन्म वर्ष एवं स्थान

यशपाल का जन्म 3 दिसम्बर 1903 को पंजाब के फिरोजपुर छावनी में हुआ था. वे हिंदी साहित्य के महान कथाकार और क्रांतिकारी लेखक थे.

यशपाल जी ने अपने लेखनी कौशल से भाषा को सरल और वर्णात्मक बनाया और हिंदी साहित्य में अपनी महत्वपूर्ण योगदान दिया.

यशपाल जी के पूर्वज हिमाचल प्रदेश के गुरुकुल कांगड़ा जिले के निवासी थे. इसलिए यशपाल जी ने अपनी आरंभिक शिक्षा वहीं प्राप्त की थी क्योंकि इनके माता – पिता और अन्य परिवार के सदस्य वही रहा करते थे.

यशपाल के माता – पिता

यशपाल के पिता जी का नाम श्री हरी लाल जी था और माता जी का नाम श्रीमती प्रेमा देवी जी था. श्री हरी लाल जी एक सामाजिक कार्यकर्ता और आर्यसमाजी थे, जो अपने समय में महत्वपूर्ण समाजसेवा कार्यों में लगे रहे.

उनकी मां श्रीमती प्रेमा देवी जी भी समाज के लिए समर्पित थीं और वे यशपाल की शिक्षा और संस्कार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाईं.

यशपाल के माता-पिता का आदरणीय संगठनकारी और साहित्यिक योगदान उनके जीवन में प्रभावशाली था, जिससे उन्होंने अपने लेखन में भी सामाजिक चेतना को प्रकट किया.

यशपाल की शिक्षा

यशपाल ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गुरुकुल कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश, में प्राप्त की. वहां उन्होंने आर्यसमाजी संस्कृति और धार्मिक शिक्षा प्राप्त की, जिससे उनका आध्यात्मिक विकास हुआ.

इसके बाद उन्होंने नेशनल कॉलेज लाहौर में अपनी शिक्षा जारी रखी और वहां से बी.ए. की डिग्री प्राप्त की.

वहीं उनकी शिक्षा ने उन्हें नाटककार उदयशंकर से मिले और उन्होंने लेखन की प्रेरणा प्राप्त की. यशपाल की शिक्षा ने उन्हें सामाजिक जागरूकता और साहित्यिक दृष्टिकोण की ओर मोड़ दिया.

उनकी शिक्षा ने उन्हें स्वतंत्रता संग्राम के आंदोलनों में भाग लेने के लिए तैयार किया और उन्होंने अपने जीवन के दौरान यह दिखाया कि शिक्षा का महत्व केवल अकादमिक नहीं, बल्कि समाज को सुधारने में भी होता है.

यशपल का कार्यक्षेत्र

यशपाल का कार्यक्षेत्र उपन्यासकार, नाटककार, और लेखक के रूप में था. उन्होंने अपने लेखनी कौशल से हिंदी साहित्य को नया दिशा देने का कार्य किया.

उनकी रचनाएँ सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर आधारित थीं और वे क्रांतिकारी विचारधारा के प्रति समर्पित थे.

उनके उपन्यास “देशद्रोही” और “झूठा सच” आदि महत्वपूर्ण रचनाएँ हैं, जिनमें समाज के अवसरों और समस्याओं का विवेचन किया गया.

उनके लेखन में सामाजिक चेतना और क्रांतिकारी दृष्टिकोण का प्रकट अंश था, जिसने उन्हें हिंदी साहित्य के महत्वपूर्ण लेखक के रूप में प्रसिद्ध किया.

यशपाल की उपाधि

यशपाल को साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में मिले कई महत्वपूर्ण पुरस्कार मिले हैं. उन्हें सन् 1970 में भारत सरकार द्वारा पद्मभूषण से सम्मानित किया गया था.

जिससे उनकी अद्वितीय योगदान को मान्यता मिली. उन्हें उनके उपन्यासों और साहित्यिक योगदान के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार भी प्राप्त हुआ.

इन पुरस्कारों के माध्यम से यशपाल ने अपने उत्कृष्ट और विचारशील साहित्यिक योगदान की महत्वपूर्ण पहचान बनाई और हिंदी साहित्य को नया दिशा देने में मदद की. उनके पुरस्कार साहित्य जगत में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को प्रमोट करते हैं.

यशपाल का मृत्यु वर्ष एवं स्थान

यशपाल का मृत्यु वर्ष 1976 ईसवी में हुआ था. उनका आखिरी समय उत्तर प्रदेश राज्य के वाराणसी जिले में बिता था.

उनकी मृत्यु का यह समय एक महत्वपूर्ण साहित्यिक युग का अंत था, जिसमें वे अपने विचारों और रचनाओं के साथ समाज को दिशा देते रहे.

उनकी मृत्यु ने साहित्य जगत में एक बड़ी कमी को छोड़ दिया, लेकिन उनकी रचनाएँ हमें आज भी उनके महत्वपूर्ण योगदान की याद दिलाती हैं और उनका काव्य और विचारधारा हमारे साहित्य के अमूल्य धरोहर के रूप में बनी रहेगी.

यशपाल का जीवन परिचय pdf

प्रिय छात्रो अब हम लोग यशपाल का जीवन परिचय pdf फाइल को डाउनलोड करने के बारे में जानने वाले है.आपको मैं एक पीडीऍफ़ फाइल दूंगा जिसमे यशपाल का जीवन परिचय साहित्यिक परिचय के साथ उनकी रचनाये आदि भी मौजूद रहेंगी.

yashpal ka jivan parichay pdf

यदि आप लोग भी नोट्स बनना चाहते है तो आपको भी yashpal ka jivan parichay pdf की आवश्यकता होगी जोकि आज मैं आपको देने वाला हु.

इसके लिए आपको निचे डाउनलोड का बटन दिख रहा होगा आपको उस पर क्लिक करके जीवन परिचय का पीडीऍफ़ फाइल डाउनलोड कर लेना है.

PDF Nameयशपाल का जीवन परिचय pdf
jivan parichay Icon PDF Size450 KB
No of Pages06
CategoryEducation
LanguageHindi
TypeDownloadble
QualityHigh
PriceFree

यशपाल का जीवन परिचय का पीडीऍफ़ को मैंने गूगल drive में अपलोड करके आपके साथ साझा किया है जिसको आप लोग बहुत ही आसानी से डाउनलोड कर सकते है.

इसके अलवा मैंने सभी लेखक एवं कवियों का जीवन परिचय का pdf इस ब्लॉग पे आप लोगो के साथ साझा इया है.

यदि आप लोगो को यशपाल का जीवन परिचय pdf को डाउनलोड करने में कही भी दिक्कत आती हैतो हमें निचे कमेंट के माध्यम से पता सकते है.

आप जब लोग एक न्यू पेज पे जायेंगे वहा पर आपको एक बटन दिखेगा फिर वह से आप लोग डायरेक्ट डाउनलोड करके अपने मोबाइल में पीडीऍफ़ को सेव कर सकते है.

यशपाल की साहित्यिक परिचय (Yashpal Sahityik Parichay)

यशपाल की साहित्य में उन्होंने समाजिक और राजनीतिक मुद्दों को उजागर किया और उन्होंने भारतीय समाज की समस्याओं और उसके उत्थान के बारे में लिखा.

उनकी रचनाओं में विभिन्न विषयों पर गहरा विचार किया गया, जैसे कि समाज, राजनीति, धर्म, आत्म-उन्नति, और मानवाधिकार.

उनके उपन्यास, कहानियाँ, नाटक, और लेखन के अन्य रूप भारतीय समाज की सामाजिक समस्याओं को उजागर करते हैं और उनके लेखन का मुख्य उद्देश्य समाज के सुधार और समृद्धि को प्रोत्साहित करना था.

यशपाल के प्रमुख रचनायें ‘दादा कामरेड’, ‘देशद्रोही’, ‘झूठा सच’, ‘मनुष्य के रूप’, ‘पिंजरे की उड़ान’, ‘ज्ञानदान’, ‘भस्मावृत्त चिनगारी’, ‘फूलों का कुर्ता’, ‘धर्मयुद्ध’, ‘तुमने क्यों कहा था मैं सुन्दर हूँ’ आदि हैं. उन्होंने अपने लेखन के माध्यम से भारतीय समाज के मुद्दों पर गहरा प्रकाश डाला और समाज में सच्चे परिवर्तन की प्रेरणा दी.

ऐसे ही और भी जीवन परिचय का पीडीऍफ़ फाइल डाउनलोड करे:

यशपाल की साहित्यिक विशेषताएँ

प्रिय छात्रो चलिए अब हम लोग यशपाल जी की साहित्यिक विशेषताए के बारे में जान लेते है और यशपाल की विशेषताएं पीडीऍफ़ फाइल भी मिल जाएगा जिसमे सारी चीजे होंगे. यशपाल की साहित्यिक विशेषताएँ निम्न है –

  • सामाजिक संवाद: यशपाल की साहित्यिक रचनाओं में सामाजिक संवाद का महत्वपूर्ण स्थान है. उन्होंने अपने कामों के माध्यम से समाज की समस्याओं और दुख-दर्द को उजागर किया और उनके समाधान के लिए जागरूकता फैलाई.
  • व्यक्तिगत अनुभव: यशपाल अपने लेखन में अपने व्यक्तिगत अनुभवों को साझा करते थे. उन्होंने अपने कहानीकारी और कविता में अपने जीवन के घटनाओं को सुंदरता के साथ प्रस्तुत किया.
  • साहित्यिक उद्देश्य: यशपाल का साहित्यिक उद्देश्य समाज के सुधार और मानवाधिकार की रक्षा करना था. उन्होंने साहित्य को एक नई सोच के साथ प्रस्तुत किया और लोगों को समाज में सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में प्रेरित किया.
  • नैतिकता: यशपाल के लेखन में नैतिकता का महत्वपूर्ण स्थान है. उन्होंने भ्रष्टाचार, अन्याय, और दुर्भावना के खिलाफ अपनी रचनाओं में आवाज बुलंद की.
  • सरल भाषा: यशपाल का लेखन सरल और जनवादी भाषा में होता था, जिससे व्यक्ति के दिल तक संदेश पहुंचता था. उनकी रचनाएं आम लोगों के बीच पसंद की जाती थीं.

यशपाल की प्रमुख रचनाएं

अब हम लोग यशपाल जी की प्रमुख रचनाये के बारे में जानेंगे. इसके साथ ही हम लोग विस्तार से भी इनके रचनाये को जानेंगे. यशपाल की प्रमुख रचनाएँ ‘दादा कामरेड’, ‘देशद्रोही’, ‘झूठा सच’, और ‘मनुष्य के रूप’ आदि हैं.

यशपाल जी की उपन्यास

  • “दादा कामरेड” – 1941 में प्रकाशित हुआ, यह उनका पहला उपन्यास था.
  • “देशद्रोही” – 1943 में लिखा गया, जिसमें राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम के मुद्दे पर चर्चा होती है.
  • “दिव्या” – 1945 में प्रकाशित, इसमें समाजिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया गया है.
  • “पार्टी कामरेड” – 1946 में प्रकाशित, यह उपन्यास सामाजिक संकटों को उजागर करता है.
  • “मनुष्य के रूप” – 1949 में प्रकाशित, मानवता के विचारों को छूने का प्रयास किया है.
  • “अमिता” – 1956 में प्रकाशित, समाज के सामाजिक विभेदन को दिखाता है.
  • “झूठा सच भाग–1” – 1958, और भाग–2 – 1960 में प्रकाशित, जीवन की सत्यता को उजागर करते हैं.
  • “बारह घंटे” – 1962 में प्रकाशित, इसमें समाज की दौड़ती जिंदगी का परिचय है.
  • “अप्सरा का शाप” – 1965 में प्रकाशित, यह कथा भारतीय मान्यताओं के बारे में है.
  • “क्यों फंसे” – 1968 में प्रकाशित, इसमें व्यक्तिगत और सामाजिक संकटों का परिचय है.
  • “तेरी मेरी उसकी बात” – 1974 में प्रकाशित, इसमें व्यक्तिगत संबंधों को छूने का प्रयास किया गया है.

यशपाल की कहानी – संग्रह

  • “पिंजरे की उड़ान” – 1939 में प्रकाशित, इसके माध्यम से समाज की दिक्कतों को प्रकट किया गया है.
  • “फूलों का कुर्ता” – 1949 में प्रकाशित, जिसमें प्राकृतिक सौन्दर्य की महत्वपूर्ण भूमिका है.
  • “धर्मयुद्ध” – 1950 में प्रकाशित, इसमें धर्मिक विवादों के प्रति उनकी चिंता को दर्शाया गया है.
  • “सच बोलने की भूल” – 1962 में प्रकाशित, यह कहानी सत्यता और झूठ के बीच की संघर्ष को दर्शाती है.
  • “भस्मावृत चिंगारी” – 1946 में प्रकाशित, स्वतंत्रता संग्राम के माहौल को उजागर किया है.
  • “उत्तनी की माँ” – 1955 में प्रकाशित, इसके माध्यम से मातृशक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका को बताया गया है.
  • “चित्र का शीर्षक” – 1951 में प्रकाशित, यह कहानी भाषा और कला के महत्व को दर्शाती है.
  • “तुमने क्यों कहा था मैं सुंदर हूँ” – 1954 में प्रकाशित, इसमें सौंदर्य के अंदर की सच्चाई को छूने का प्रयास किया गया है.
  • “ज्ञानदान” – 1943 में प्रकाशित, ज्ञान की महत्वपूर्ण भूमिका को प्रमोट किया गया है.
  • “वो दुनिया” – 1948 में प्रकाशित, समाज की सामाजिक समस्याओं को दर्शाती है.
  • “खच्चर और आदमी” – 1965 में प्रकाशित, इसमें प्राकृतिक जीवन के संघर्ष को छूने का प्रयास किया गया है.
  • “भूख के तीन दिन” – 1968 में प्रकाशित, यह कहानी गरीबी और भूख के प्रति उनकी संवेदना को दर्शाती है.
  • “उत्तराधिकारी” – 1951 में प्रकाशित, इसमें समाज के विभेदन को प्रकट किया गया है.
  • “अभिशिप्त” – 1943 में प्रकाशित, इसमें व्यक्तिगत संघर्ष को दर्शाया गया है.

यशपाल की व्यंग्य – संग्रह

  • “चक्कर क्लब” – इस व्यंग्य संग्रह में यशपाल ने समाज में क्लब की अच्छाई और दिखावट के पीछे की जाने वाली दुनिया को व्यंग्यपूर्ण तरीके से प्रस्तुत किया है. यहाँ पर उन्होंने समाज के तबके और उनके चक्करों को हास्य के साथ दिखाया है.
  • “कुत्ते की पूंछ” – इस संग्रह में, यशपाल ने समाज में हुई हिपोक्रिसी और दुश्मनी को व्यंग्य से प्रस्तुत किया है. यह व्यंग्य संग्रह उनकी आलोचना कौशल को दर्शाता है और आधुनिक समाज की कुछ अच्छाई और बुराईयों को चुनौती देता है.

यशपाल की भाषा शैली

यशपाल की भाषा शैली विशेषत: यशपाल के लेखन में भाषा की सरलता और वर्णात्मकता का बड़ा महत्व होता है.

उनकी भाषा साधारण लोगों के साथ संवाद करने की तरह सुलझी होती है, जिससे पाठकों को उनके रचनाओं को समझने में आसानी होती है.

उनकी भाषा में हास्य, व्यंग्य, और समाज की चुनौतियों को प्रकट करने का अद्वितीय तरीका होता है. यशपाल का भाषा उपयोग सामाजिक संदेशों को स्पष्टता से पहुंचाने के लिए महत्वपूर्ण होता है और इससे उनके लेखन की विशेष पहचान होती है.

यशपाल की पुरस्कार

यशपाल को भारतीय साहित्य में अनेक पुरस्कार मिले, जिनमें उनके योगदान की महत्वपूर्ण पहचान है. इनमें से कुछ पुरस्कार निम्नलिखित हैं:

  • ‘देव पुरस्कार’ (1955) – यशपाल को इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया जो उनके उपन्यास ‘मेरी तेरी उसकी बात’ के लिए था.
  • ‘सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार’ (1969) – यशपाल को इस पुरस्कार से नवीन पुरुषार्थ और साहित्य में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया.
  • ‘पद्म भूषण’ (1970) – यशपाल को भारत सरकार द्वारा ‘पद्म भूषण’ से सम्मानित किया गया जो उनके साहित्यिक योगदान की प्रशंसा थी.
  • ‘मंगला प्रसाद पारितोषिक’ (1971) – यशपाल को इस पारितोषिक से सम्मानित किया गया जो उनके अद्वितीय लेखन कौशल की प्रशंसा करता था.
  • साहित्य अकादमी पुरस्कार (1976) – यशपाल को भारतीय साहित्य अकादमी द्वारा प्रदान किया गया यह पुरस्कार उनके योगदान के लिए था, और इससे उनका लेखन कार्य प्रशंसा प्राप्त करता है.
Video Lecture on Yashpal Ka Jivan Parichay

FAQs: अक्सर पूछे जाने वाला सवाल

प्रश्न: यशपाल जी की रचनाएं कौन कौन सी है?

उत्तर: यशपाल जी की प्रमुख रचनाएं उपन्यास “दादा कामरेड,” “देशद्रोही,” “मनुष्य के रूप,” और कहानी संग्रह “फूलों का कुर्ता,” “ज्ञानदान” आदि हैं.

प्रश्न: लेखक यशपाल का जन्म कब और कहां हुआ?

उत्तर: लेखक यशपाल का जन्म 3 दिसम्बर 1903 को पंजाब राज्य के फिरोजपुर छावनी में हुआ था.

प्रश्न: यशपाल की पहली कहानी कौन सी है?

उत्तर: यशपाल की पहली कहानी ‘पिंजरे की उड़ान’ है.

प्रश्न: यशपाल जी कौन है?

उत्तर: यशपाल भारतीय लेखक और साहित्यिक थे, जिन्होंने अपने उपन्यास, कहानियाँ, और व्यंग्य के लिए प्रसिद्धता प्राप्त की थी. उन्होंने आधुनिक भारतीय साहित्य में महत्वपूर्ण योगदान किया.

प्रश्न: यशपाल की पत्नी का नाम?

उत्तर: यशपाल की पत्नी का नाम ज्ञात नही है.

निष्कर्ष

प्रिय छात्रो आज हम लोगो ने “Yashpal Ka Jivan Parichay” के बारे में काफी विस्तार से जाना और समझा है. इसके साथ ही हम लोगो ने यशपाल की साहित्यिक विशेषताए एवं रचनाये के बारे में भी जाना है.

यशपाल जी को साहित्य के क्षेत्र में अनेको पुरस्कार भी मिले है जिसके बारे में हमने एक – एक करके अच्छे से जाना है. यशपाल जी की रचनाये अत्यंत मनमोहक थे जिसे पढने वाले लोग इनके दीवाने हो जाते थे.

आज हम लोगो ने यशपाल का जीवन परिचय pdf को भी डाउनलोड करने के बारे में भी अच्छे से जाना है. मुझे उम्मीद है की आपको पीडीऍफ़ फाइल मिल गयी होगी.

यदि किसी भी प्रकार का कोई सवाल है यशपाल से रिलेटेड तो निचे आपके लिए प्रश्नों का उत्तर मैंने दिया है.

प्रिय स्टूडेंट्स, मेरा नाम आशीर्वाद चौरसिया है और मैंने हिन्दी विषय से स्नातक भी किया है। आपको इस ब्लॉग पर हिन्दी से जुड़े सभी तरह के जानकारिय मिलेगी। इसके अतिरिक्त आपको सभी क्लासेज की नोट्स एवं विडियो लेक्चर हमारे NCERT eNotes YouTube चैनल पर मिल जाएगी।

SHARE ON:

1 thought on “[PDF] यशपाल का जीवन परिचय – Yashpal Ka Jivan Parichay Class 10th”

Leave a Comment